अधूरा प्यार अधूरी कहानी

Part 1 वक़्त बदल रहा था और हम भी उस वक़्त एक चाँद आँखों के सामने आ गया और हम उसे निहार रहे थे। तभी उधर से एक आवाज आती है ओये क्या देख रहा है कभी देखा नहीं क्या लड़की, उस वक़्त होठो पे थोड़ी मुस्कान थी और दिल विमर्श था, वक़्त गुजरता गया और मेरे देखने के चाह बढ़ती गई, रोज सुबह वो हमेसा साइकिल चलाने घर से निकलती थे,और हम एक दूसरे को दूर से निहारते थे, कुछ पल ऐसे ही चलता रहा, एक दिन मैंने सोच ही लिया था, उसे आज अपने दिल के बात बोलना है लेकिन अंदर एक दर भी था कही वो बुरा तो नहीं मान जायेगी, अगले ही सुबह मैं उसका उसी मोड़ पर इंतज़ार कर रहा था, और जैसे वो आई मेरी हिम्मत ने मेरा साथ नहीं दिया और मैं उस बोल नहीं पाया, ऐसे करते वक़्त को बीते 3 साल हो गए थे, पर एक दिन मैंने फैसला कर लिया था आज अपने दिल की बात बोलनी है, सुबह का वक़्त था मेरी आँखें खुली उस वक़्त लग रहा था कि आज एक नया सवेरा हुआ है, मैं तैयार होके उसी जगह चला गया, और वो आ रही थी, मैंने उसे इशारे से रुकने को कहा और वो रुक गई, मैंने उससे कहा मैं आपसे कुछ कहना चाहता हु, हा कहो और वो मुस्कुरा रही थी, समझ में नहीं आ रहा था कैसे कहु लेकिन आज नहीं तो फिर कभी नहीं, मैंने उससे कहा मैं आपको 3 सालो से देख रहा हु , हा तो मैं भी देख रही हु,और इतना कहते वो शर्मा गई, फिर शायद मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी,मैंने कहा शायद मुझे आपसे प्यार हो गया है, बुध्धु इतना सा बोलने में इतना वक़्त लगा दिए, क्या करूँ एक डर होता था कही मैं तुम्हे खो न दू, पागल पहले पा तो लेते फिर खोने के बात करते, एक बात बोलू, है बोलो क्या आप मुझसे प्यार करती है, अगर नहीं करती तो अब तक तुम्हारा गाल मेरे हाथों से लाल हो चूका होता दफर, आपका नाम क्या है, तुम्हे मेरा नाम पता अदिती और मेरा नाम रुको मुझे पता है तुम्हारा नाम, कैसे तुम्हे कैसे पता मेरा, तुम्हारा नाम स्वयम है न, है पर तुम्हे कैसे पता , बस हम जिससे प्यार करते है उस नाम भी पता चल जाता है, सही कहा अपने, क्या हम शाम को मिल सकते है, हा क्यों नहीं पर कहा निधी कैफ़े देखा है, है देखा तो है फिर वही मिलते है शाम 5 बजे क्या कहती हो ठीक है जैसा तुम्हे ठीक लगे, फिर उसे वक़्त मैं घर चला गया और मेरे हाओ भाव बदल गए मैं खुश था शाम का इंतज़ार नहीं हो रहा था, कभी टीवी देख कर वक़्त बिताने की कोशिश कर रहा था, तो कभी, गाना सुन कर पर अंदर की उलझने कम होने का नाम नहीं ले रही थी, किसी तरह वक़्त गुजरा और शाम 4 बज गए, और मैंने सोचा अब तैयार हो जाते है क्योंकि मैं लेट नहीं होना चाहता था, पर ये समझ नहीं पा रहा था कि क्या पहनकर जाऊ, आखिर छोटी बहन के सलाह से टीशर्ट और जीन्स पहन ली और जब मैं वहां पंहुचा तो उसे देख कर मैं देखता रह गया, आगे फिर जो हुआ वो कल की कहानी में देखिएगा। To Be Continued.....

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