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Nepali Kings during the 240 years of Monarchy 1. Prithvi Narayan Shah (1743-1775) 2. Pratap Singh Shah (1775-1777) 3. Rana Bahadur Shah (1777-1799) 4. Girvan Yudha Bikram Shah (1799-1816) 5. Rajendra Bikram Shah (1816-1847) 6. Surendra Bikram Shah (1847-1881) 7. Prithvi Bir Bikram Shah (1881-1911) 8. Tribhuvan Bir Bikram Shah (1911-1955) 9. Mahendra Bir Bikram Shah (1955-1972) 10. Birendra Bir Bikram Shah (1972-2001) 11. Dipendra Bir Bikram Shah (June 2, 2001 to June 4, 2001) 12. Gyanendra Bir Bikram Shah (2001 – 2008) 1. Prithvi Narayan Shah Prithvi Narayan Shah (1743-1775) Father: Narbhupal Shah Mother: Kaushalyawati Wives: Narendra Rajya Laxmi,Indra Kumari Ruled: 1743-1775 He seized many states and combined them into a Gorkha Kingdom and laid the fundamentals for an independent country. He defeated the British and Muslim forces and was known to give Dibya Upadesh (Divine Counsel) to his descendants. During his era many now famous tourist attractions like the the nine...

महाकाली सीमाका बजार र बस्तीहरू

‘के वर्षको ८ क्विन्टल यार्सागुम्बा उत्पादनगरेर सरकारलाई प्रतिकिलो २५ हजार रुपैयाँ कर बुझाउने जिल्ला गरिब हुन सक्छ ? तर दार्चुला जिल्लाको अवस्था यस्तै छ । हामी बाटो बनेर पनि दुर्गम छौं । बाटो नबन्दा पनि दुर्गम थियौं,’ यो अभिव्यक्ति हो अपि नगरपालिका, दार्चुलाका सञ्चारकर्मी कमल जोशीको । उनको यो भनाइसँग दार्चुलावासीको खासै असहमति नहोला । छिमेकीको विकास देखेर हीनताबोध हुनु स्वाभाविक हो । धेरै तन्नेरी हीनताबोधको सिकार भएका छन् । महाकाली नदीको वारि र पारि, दुवैतिर विशाल पहाड उभिएका छन् । नेपालबाट हेर्दा भारतीय पहाडमा बिहानको सूर्य पहिले उदाउँछ । भारततिरबाट हेर्दा नेपाली पहाडमा सूर्यको पहिलो किरण परेको देखिन्छ । ढिलैसम्म दुवै पहाडको फेदीमा छ्याङ्ग उज्यालो हुँदैन । पहाड ठूलो र अग्लो भएपछि त्यसले उज्यालोलाई पनि छेक्ने तागत राख्छ । पहाडको त्यही फेदीमा एकातिर दार्चुलाको खलङ्गा बजार छ, अर्कातिर भारतीय राज्य उत्तराखण्डको धार्चुला बजार । यी दुवै बजार महाकाली नदीमाथिको एउटा निकै पुरानो, धरापजस्तो, झोलुंगे पुलले जोडिएका छन् । यो पुल नेपाल–भारतको सिमाना पनि हो र सुरक्षा पनि । पुलको दुवैतर्फ जस्ताक...

today with bauwa

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NAUGHTY GIRLS RJ Ashish 93 5 Red FM

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Best Of Baua And Nand Kishore Bairagi Part 3rd

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Best Of Baua And Nand Kishore Bairagi Part 3rd

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Kabhi Nahin

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दार्चुला जिल्लाको संक्षिप्त परिचय नेपालको सुदूर पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तरगत महाकाली अञ्चलका ४ जिल्ला मध्ये छुट्टै महत्व रहेको यो जिल्ला एशियाका दुई शक्तिशाली राष्ट्र भारत र चीनको सिमानासंग जोडिएको दार्चुला जिल्लाको नाम दार्चुला कसरी रहन गयो भन्ने सम्बन्धमा कुनै लिखित प्रमाण प्राप्त नभएतापनि विभिन्न किबंदन्तिहरु सुन्न पाईन्छन् । दार्चुला शव्द उच्चारण गर्दा दारचूला भए पनि स्थानीय भाषाको दुईवटा शव्द धार र चूला बाट विकसित भएको हो। स्थानीय भाषामा धारको अर्थ पहाडको अग्लो चुचुरो र चुलाको अर्थ चुल्हो हुन्छ। यस भेगमा खान पकाउन प्रयोग गरीने चुल्होहरु प्रायः एक समानका तिन वटा ढुङ्गाहरुमा माटो पोतेर चुचुरो को आकारमा वनेका हुन्छन् । यसरी तिनै तिर चुचुरो (धार) जस्तो चुल्हो वनाई खान पकाउने ठाउँ भएकोले धारचुला नाम रहेको र धारचुला पछि अपभ्रम्स भई दारचुला र त्यसपछि दार्चुला वन्न गएको हो भन्ने एक थरिको भनाई रहेको छ । अर्को किम्वदन्ति अनुसार यहाँ स्थित तिन वटा पहाडका चुचुराहरु वर्तमानमा एक पहाड भारत र दुई वटा पहाड नेपाल मै रहेका छन् । फेदी बाट हेर्दा धार परेको जस्तो स्थानीय चुल्होको आकारमा चुचुर...

History of Kurukshetra

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महाभारत महाभारत की १८ अक्षोहिणी सेना और कुरुक्षेत्र का क्षेत्रफल भारतीय इतिहास और महाभारत युद्ध को झूठा कहने वालो के मुह पर जोरदार तमाचा लगाता ज्ञान वर्धक लेख : युद्ध के लिए आवश्यक सैनिक, रथादि वाहन, घुड़सवार आदि का वर्गीकरण और सेना की संरचना। अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था। ये संस्कृत का शब्द है। विभिन्न स्रोतों से इसकी संख्या में कुछ कुछ अंतर मिलते हैं। महाभारत के अनुसार इसमें २१,८७० रथ, २१,८७० हाथी, ६५, ६१० घुड़सवार एवं १,०९,३५० पैदल सैनिक होते थे। महाभारत, (आदि पर्व – २. १५-२३) इसके अनुसार इनका अनुपात १ रथ:१ गज:३ घुड़सवार:५ पैदल सैनिक होता था। इसके प्रत्येक भाग की संख्या के अंकों का कुल जमा १८ आता है। एक घोडे पर एक सवार बैठा होगा, हाथी पर कम से कम दो व्यक्तियों का होना आवश्यक है, एक पीलवान और दूसरा लडने वाला योद्धा, इसी प्रकार एक रथ में दो मनुष्य और चार घोडे रहे होंगें, इस प्रकार महाभारत की सेना के मनुष्यों की संख्या कम से कम ४६,८१,९२० और घोडों की संख्या, रथ में जुते हुओं को लगा कर २७,१५,६२० हुई इस संख्या में दोनों ओर के मुख्य योद्धा कुरूक्षेत्र के मैदान में एक...
घाटी में चौपट शिक्षा जुलाई माह से कश्मीर घाटी में शुरू हुए बंद और हिंसक प्रदर्शनों के दौर के बीच जहाँ व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है वहीं घाटी में बच्चों की शिक्षा पूरी तरह से ठप हो गयी है. अलगाववादियों की तरफ से जिस तरह से स्कूलों को भी निशाने पर लिया जा रहा है वह अपने आप में बहुत ही चिंताजनक बात है क्योंकि जब ये बच्चे पढ़ने नहीं जा पायेंगें तो उनके आस पास चल रही हिंसक गतिविधों से लगाकर विरोध प्रदर्शनों तक का उन पर बुरा प्रभाव पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है. कई बार ऐसा देखने में भी आया है कि छोटे बच्चे भी अलगाववादियों और सुरक्षा बलों के संघर्षों में फंसकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं या फिर उनकी मृत्यु तक हो गयी है. इस परिस्थिति से निपटने के लिए आखिर किस स्तर पर प्रयास किये जाने की आवश्यकता है आज यह समझने की ज़रुरत तो है ही साथ ही आने वाले समय में इस तरह के माहौल में बच्चों को किस तरह से पूरी तरह से इससे बाहर रखा जाये एक नीति के तौर पर उस पर भी विचार किये जाने की तरफ सोचा जाना आवश्यक होता जा रहा है क्योंकि केवल घाटी को छोड़कर जम्मू, लद्दाख और सीमावर्ती जिलों में स्थिति पूरी तरह से ...
दिवाली से पहले बाजार पूरी तरह से सज चुके हैं। लोगों ने भी धनतेरस व दिवाली के लिए खरीदारियां शुरू कर दी हैं। इस बार बाजारों में पिछले सालों के मुकाबले काफी भीड़ दिखाई दे रही है व रौनक भी बाजार में लौट आई है। दूसरी तरफ खरीददार चाईनीज सामान से मुंह मोड़ रहे हैं तो वहीं मिटटी का सामान बेचने वालो के चेहरे पर काफी रौनक है। जानकारी के अनुसार दिवाली व धनतेरस की खरीददारियां अंबाला के बाजारों में भी शुरू हो चुकी है। इस बार लोग कुछ ज्यादा दिल खोलकर शोपिंग कर रहे हैं। अंबाला के बाजारों में पिछले सालों के मुकाबले इस बार व्यापार काफी अच्छा दिख रहा है तो बाजारों में काफी रौनक दिखाई दे रही है। अंबाला छावनी का राम बाजार हर त्यौहार पर सामान खरीदने के लिए लोगों की पहली पसंद बनता है क्योंकि यहां एक ही बाजार में पूजन से लेकर सजावट का सामान आसानी से एक ही जगह पर मिलता है। इसलिए इस बाजार में काफी अच्छी भीड़ दिखाई देती है। अंबाला के लोग इस बार स्वदेशी अपना कर ज्यादा खुश दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें बाजार से चाईनीज सामान इस बार गायब दिखाई दिया। वे भी चाईनीज से परहेज कर रहे हैं। बाजार मे...

मनदीप की शहादत पर दिवाली न मनाने की घोषणा

कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र के गांव अंटेहड़ी में आज शहीद मनदीप सिंह का अंतिम संस्कार सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ किया गया है। शहीद मनदीप सिंह का शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया है। उनके पैतृक गांव से उनकी अंतिम विदाई की गई थी। बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। सेना के अधिकारी ,शहीद मनदीप को गार्ड ऑफ ऑनर देने सेना के अधिकारी व एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष एम.एस बिट्टा भी पहुंचे। शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की घोषणा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शहीद मनदीप के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए देने की घोषणा की है। वहीं, खट्टर ने शहीद के परिजनों से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि आपके बेटे का बदला लेंगे। दिवाली वाले दिन नए घर में जाने का सोचा था: भाई संदीप मनदीप के बड़े भाई संदीप का कहना है कि उन्होंने हाल ही में नई कोठी बनाई है। तय हुआ था कि दिवाली वाले दिन नए घर में शिफ्ट होंगे। मनदीप ने मई 2015 में नया घर बनवाना शुरू किया था। यह अब लगभग बनकर तैयार हो चुका है। शिफ्ट होने के लिए दिवाली को घर में पूजा रखी थी। बेटे की शहादत पर ...

Shree Hanuman Chalisa 1

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